त्योहार – Viral Charcha Hindi https://www.viralcharcha.com/hi Let's do Charcha About VIRAL Content! Sun, 04 Oct 2020 07:20:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.5.1 होली के रंग छुड़ाने के 3 असरदार आसान और घरेलू तरीके https://www.viralcharcha.com/hi/holi-ke-rang.html https://www.viralcharcha.com/hi/holi-ke-rang.html#respond Wed, 30 Sep 2020 17:37:54 +0000 https://www.viralcharcha.com/hi/?p=225 होली के रंग
होली रंगों से भरा त्यौहार है। होली के रंग बड़े प्यारे होते हैं । होली कोई राज्य में एक दिन तो कोई राज्यों में पांच दिन भी खेली जाती है।  इसी लिए उसको रंग पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।  होली बिना रंगों और पानी के खेलने मज़ा नही आता।  कोई लोग होली खेलने के लिए प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल करते है और कोई लोग केमिकल युक्त रंग से होली खेलते है। होली में रंगों से खेलते समय तो हमें बहुत मजा आता है लेकिन होली खेलने के बाद जब रंग निकालना होता है तब सारा दम निकल जाता है। 

जो प्राकृतिक रंग होते हैं उन्हें निकालने में ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होती। लेकिन जो केमिकल वाले रंग होते हैं वह जल्दी से नहीं निकलते।होली खेलने के लिए जाने से पहले ही नारियल का तेल या सरसो का तेल लगाना चाहिए जिस से रंग अपने शरीर पे लगे नहीं और लगे तो आसानी से निकल जाये.और अगर रंग शरीर पर रह जाये तो उसे रगड़ के नही निकाल ना चाहिए इससे आपकी त्वचा को नुकशान हो सकता है।    

लेकिन कुछ घरेलू नुश्खे अपना के हम इन रंगों से आसानी से छुटकारा पा सकते है। और कुछ नुस्खे ऐसे भी है जिससे बालों को भी ख़राब होने से बचा सकते है। और ये रंग छुड़ाने के नुस्खे का सामान आपको बहार ढूंढने की जरुरत नहीं पड़ेगी। वो हमे आसानी से घर में रोजिंदा जीवन में इस्तेमाल करने वाली चीजें ही हैं । सबसे पहले हम होली खेलने के बाद बालों का रूखापन दूर करने के बारे में बताएँगे . 

हेयर पैक

ये हेयर पैक से हम रंगोकी वजह से बालों को बे जान होने से बचा सकते है। जिस के लिए हमे थोड़ा सा मिल्क पाउडर को थोड़े से दूध में मिला के घोल तैयार करना है .ये घोल में हमे थोड़ा सा शहद मिलाना है। ये घोल बालों में लगा के आधा घंटा लगाके बाल खुले छोड़ने है और बाद में बाल शैम्पू से धोने है। 

इससे आप के बाल पहले जैसे शाइनी और स्मूथ हो जायेंगे। बाल धोने के थोड़ी देर पहले दही लगा के रहने दो और शैम्पू करलो इससे भी बाल मुलायम और चमकीले हो जाते है .


अब हम जानेंगे की मुँह और बदन के बाकि हिस्सों से कैसे स्क्रब, पैक और अलग अलग तरीकों से  होली के रंग निकाला जा सकता है .

घर मे रही ४-५ अलग अलग दाल का उपयोग कर के एक स्क्रब तैयार करे उसमे थोड़ा सा कच्चा दूध मिला के मुंह पे लगाए थोड़ा टाइम रहने दे. आप चाहे तो इसमें थोड़ा सा निम्बू भी दाल सकते है  और  बाद में हलके हाथों से  घिस के निकाले इसे हमे होली के पक्के रंगों से छुटकारा मिल जायेगा। 

ऐसे ही एक जाना माना तरीका भी है जिस से हम रंग आसानी से निकाल  सकते है। चने के आटे में थोड़ा दूध और निम्बू मिला कर एक घोल  तैयार करे  और उसे अपने शरीर पर जहा से रंग  निकल न रहा हो वहा लगा ले और १५ मिनट तक रहने दे और घुन घुने पानि से हाथ मुंह धो ले।

बेसन और दूध के साथ थोड़ा सा मुली का रस मिला के एक पेस्ट बनाये इसे चहेरे पे लगाए और थोड़ी देर बाद चेहरे को धो ले इसे चेहेरे से होली के रंगों से मुक्ति मिल सकती है.

होली खेलने से पहले हम लोग तेल तो लगाते ही है अगर होली के रंग से बचना हो तो हम मेकप लगा सकते है जिसे आप सुन्दर भी दिखोगे और रंगों के इफ़ेक्ट से भी बच जाओगे लेकिन इतना ध्यान रखे की मेकप वॉटरप्रूफ होना चाहिए.

अगर हम सिर्फ गुलाल के साथ होली खेल रहे है तो उसे निकाल ने भी पानी का इस्तेमाल कर ने से पहले उसे सूखा ही साफ़ कर लें इसके बाद ही पानी से साफ़ करे जिसे गुलाल पूरे शरीर पर ज्यादा फेलेगा नहीं।

होली खेलने टाइम रंग आंख में और मुंह में ना जाए उसका ध्यान रखे। अगर आंख में रंग जाता हैं तो उसे तुरन्त ही पानी से धो ले क्योंकि रंग आंख में जाने की बजे से आंखों में जलन हो सकती है। रंग आंखों में ना जाए उसके लिए हमें चस्मा पहेनना चाहिए। रंग मुंह में जाने की बजे से होंठ जल सकते हैं। जायदा केमिकल वाले रंग नुक़सान कारक साबित हो सकते है।

छोटे बच्चो को केमीकल वाले होली के रंग से दूर ही रखना चाहिए क्योंकि अगर उन्होंने को रंग गलती से मुंह में डाल दिया तो उनके लिए ये बहोत ही भारी पद सकता है।होली हमें खेलनी चाहिए लेकिन बहुत ध्यान रख के और सावधानी से खेलनी चाहिए। होली खेलने के टाइम खुदको या किसी और को रंगों से या किसी और तरीके से नुकसान ना हो ऐसे सावधानी बरतनी चाहिए। होली के रंग औरगेनिक ही लाने चाहिए जिस से किसी को परेशानी ना हो और अगर केमिकल वाले  रंगों से खेल रहे हो तो घरेलू नुश्खे अपना के रंगों को निकाल सकते है और किसी भी तरह के नुकसान से बचा सकते है।

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१५ अगस्त स्वतंत्रता दिन की शुभ कामनायें https://www.viralcharcha.com/hi/15-august-indian-independence-day.html https://www.viralcharcha.com/hi/15-august-indian-independence-day.html#respond Sat, 15 Aug 2020 01:30:31 +0000 https://www.viralcharcha.com/hi/?p=246 15 August Indian Independence Dayआज १५ अगस्त २०२०, आज अपने भारत देश को आजादी मिले ७३ साल पुरे हो गए. आज हम सभी भारतवासी ७४ वा स्वातंत्र्य दिन मना रहे है. पूरी दुनिया में फैली इस कोरोना महामारी के संक्रमण की वजह से हम सभी पर कुछ बंधन है,.  सभी नागरिक एक दूसरे से  सामाजिक दूरी बनाकर स्वतंत्रता का  […]]]> 15 August Indian Independence Day

आज १५ अगस्त २०२०, आज अपने भारत देश को आजादी मिले ७३ साल पुरे हो गए. आज हम सभी भारतवासी ७४ वा स्वातंत्र्य दिन मना रहे है. पूरी दुनिया में फैली इस कोरोना महामारी के संक्रमण की वजह से हम सभी पर कुछ बंधन है,.  सभी नागरिक एक दूसरे से  सामाजिक दूरी बनाकर स्वतंत्रता का  यह उत्सव पूरे उत्साह के साथ मना रहे है एक दूसरे को हार्दिक बधाई दे रहे है.

 १५ अगस्त १९४७ – हमारे देश के इतिहास का सुन-हरा दिन है, क्योंकि इसी दिन अपना भारत देश अंग्रेजों के जुल्मी शासन से आजाद हुआ. १५ अगस्त १९४७ को पहली बार दिल्ली के लाल किले कि प्राचीर से हमारे देश के प्रथम पंत प्रधान पंडित जवाहरलाल नेहरू जीने (जिन्हे हम चाचा नेहरू के नाम से भी जानते है) भारत का तिरंगा ध्वज फहराया था. २०० साल से भारतवासी आजादी का जो सुन-हरा सपना देख रहे थे वह पुरा हुआ था.  ब्रिटिश संसद ने भारत के आख़िरी व्हाईसराय के रूप मे लॉर्ड माउंटबेटन को भारत भेजा. ३० जून १९४८ तक भारत की सत्ता भारतीय लोगों को सौंप ने का अधिकार लॉर्ड माउंटबेटन को दिया था. माउंटबेटन ने ही भारत की आजादी के लिए १५ अगस्त की तारीख चुनी थी.  कुछ इतिहास कारों का यह भी मानना है कि सी राजगोपालाचारी के सुझाव पर लॉर्ड माउंटबेटन ने इस तारीख को चुना था. सी राजगोपालाचारी का कहना था कि अगर ३०जून१९४८ तक इंतजार किया गया तो भारत मे चालू अवज्ञा आंदोलन कि वजह से हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता शेष नहीं होगी. 

अगस्त १९४२ में महात्मा गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ कि शुरुआत कि तथा स्वदेसीआंदोलन, सामुदायिक अवज्ञा आंदोलन और करो या मरो आंदोलन कि घोषणा की. महात्मा गाँधीजी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में कई लोग अपनी और अपने परिवार कि चिंता किये बगैर आने वाले पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिये स्वतंत्रता संग्राम मे शामिल हुये. कई लोगो ने अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया.

एक तरफ गांधी जी का अहिंसक आंदोलन चालू था वही दूसरी ओर कई क्रांतीकारीयो ने भी अपनी जान कि पर्वा किये बगैर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन कीया. इस कि शुरुवात हुई १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से. १८५७ का विद्रोह, जो मेरठ में सैन्य  कर्मियों की बगावत से शुरू हुआ, जल्दी ही आगे फैल गया और इससे ब्रिटिश शासन को एक गंभीर चुनौती मिली. क्रांतिकारी आंदोलन का समय सामान्यतः लोगों ने सन् १८५७ से १९४२ तक माना है. भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है. भारतीय स्वतंत्रता के सशस्त्र संग्राम की विशेषता यह रही है कि क्रांतिकारियों के मुक्ति प्रयास कभी शिथिल नहीं हुए.  स्वतंत्रता संग्राम में चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, भगत सिंग, सुखदेव, राजगुरू, वीर सावरकर जैसे कई वीर सपूतोने भारत मां के लिये अपने जीवन कि आहुती दि.

आजादी के इस सफर में एक और नाम हम नही भूल सकते वो है नेताजी सुभाषचंद्र बोस का. कोलकाता के स्वतन्त्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के कार्य से प्रेरित होकर सुभाषचंद्र जी स्वतंत्रता संग्राम मे शामील हुये. अपने कार्य कर्तुत्व से सुभाष जी दिसंबर १९२७ मे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और १९३८ मे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये. धीरे – धीरे कांग्रेस से सुभाष जी का मोह भंग होने लगा. १६ मार्च १९३९ मे सुभाष जी ने कांग्रेस से अपने पद का इस्तिफा दे दिया. 

सुभाष बाबू ने आजादी के आंदोलन को एक नयी राह देते हुये युवाओं को सम्मेलीत किया. उन्होने आशियाई देशोमे रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को अपने इस आंदोलन मे सामील किया. पूर्वी एशिया पहुँचकर सुभाष ने सर्वप्रथम वयोवृद्ध क्रांतिकारी रास बिहारी बोस से मिले, रास बिहारी बोस जी ने स्वेच्छा से स्वतंत्रता परिषद का नेतृत्व सुभाष को सौंपा था. २९ मई १९४२ के दिन, सुभाष जर्मनी के सर्वोच्च नेता एडॉल्फ हिटलर से मिले। लेकिन हिटलर को भारत के विषय में विशेष रुचि नहीं थी। उन्होने सुभाष को सहायता का कोई स्पष्ट वचन नहीं दिया. नेताजी सुभाष जापान के प्रधानमंत्री जनरल हिदेकी तोजो से भी मिले,  नेताजी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर जापान के प्रधानमंत्री ने उन्हें सहयोग करने का आश्वासन दिया. ५ जुलाई १९४३ को सिंगापुर में ‘आजाद हिंद फ़ौज’ का गठन किया.

२१ अक्टूबर १९४३ को अस्थायी स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया. वे खुद इस सरकार के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और युद्धमन्त्री बने. इस सरकार को कुल नौ देशों ने मान्यता दी. नेताजी आज़ाद हिन्द फौज के प्रधान सेनापति भी बन गये. पूर्वी एशिया के लोगों को साम्मेलीत कर उन्हे आजाद हिंद फौज मे शामिल होने और आर्थिक मदद देने का आवाहन किया. उन्होने अपने आवाहन मे यह संदेश भी दिया कि “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आज़ाद हिन्द फौज ने जापानी सेना के सहयोग से भारत पर आक्रमण किया. अपनी फौज को प्रेरित करने के लिये नेताजी ने ” दिल्ली चलो” का नारा दिया. दोनों फौजों ने अंग्रेजों से अंडमान और निकोबार द्वीप जीत लिये. नेताजी ने इन द्वीपों को “शहीद द्वीप” और “स्वराज द्वीप” का नया नाम दिया. दोनों फौजों ने मिलकर इंफाल और कोहिमा पर आक्रमण किया. लेकिन बाद में अंग्रेजों का पलड़ा भारी पड़ा और दोनों फौजों को पीछे हटना पड़ा.

द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद, नेताजी को नया रास्ता ढूँढना जरूरी था. उन्होने रूस (रशिया) से सहायता माँगने का निश्चय किया था. १८ अगस्त १९४५ को नेताजी हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ जा रहे थे. इस सफर के दौरान वे लापता हो गये. ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.  भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त दस्तावेज़ के अनुसार नेताजी की मृत्यु १८ अगस्त १९४५  को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में हुई थी.

देश के इन्ही सपूतोंको याद करते हुये आईये हम सब मिल कर उनके सपनों के सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण करने का संकल्प करे.

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कृष्ण जन्माष्टमी https://www.viralcharcha.com/hi/krishna-janmashtami.html https://www.viralcharcha.com/hi/krishna-janmashtami.html#respond Fri, 03 Jan 2020 22:30:50 +0000 https://www.viralcharcha.com/hi/?p=236 Krishna Janmashtamiकृष्ण जन्माष्टमी जिसे जन्माष्टमी या गोकुलअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|  यह त्योहार हर साल श्रावण मास के कृष्णपक्ष में आठवेदिन मनाया जाता है|  प्रभु विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्णा के जन्म के अवसर पर यह त्योहार मनाया जाता है| हिंदुओं के वैष्णव पंथीयों में इस त्यौहार का एक अनन्य साधारण महत्व […]]]> Krishna Janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी जिसे जन्माष्टमी या गोकुलअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|  यह त्योहार हर साल श्रावण मास के कृष्णपक्ष में आठवेदिन मनाया जाता है|  प्रभु विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्णा के जन्म के अवसर पर यह त्योहार मनाया जाता है| हिंदुओं के वैष्णव पंथीयों में इस त्यौहार का एक अनन्य साधारण महत्व है| इस दिन भागवत पुराण, भग्वदगीता का वाचन और कृष्ण लीलाओं का गायन किया जाता है| कहीं लोग उपवास भी रखते हैं| पुरे भारतवर्षमें यह त्यौहार हर्ष और उल्हास के साथ मनाते हैं| खास कर मथुरा और  वृंदावन में बहुत यह त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है| 

Krishna Janmashtami
Krishna Janmashtami

महाराष्ट्र में गोकुलाष्टमी के दूसरे दिन दहीहंडी उत्सव का आयोजन होता है जो मुंबई, ठाणे, पुणे तथा अन्य शहरों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है|  बाल अवस्था में भगवान कृष्ण उनके सखा और मित्रों के साथ मिलकर नगरजनों के घरोसे माखन चुराया करते थे और सभी मित्र एक साथ मिलकर उस माखन का आनंद लेते थे|  प्रभु श्रीकृष्ण के इन्हीं लिलाओ याद करते हुए यह त्यौहार मनाया जाता है| 

इस दिन दहीहंडी फोड़ने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है  बाल गोपालोंके दल एक के ऊपर एक परत रचकर ऊंचाई पर बांधी गई मटकी  फोड़ते हैं| यह त्योहार सामाजिक एकता और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है इसमें शामिल होने वाले बाल गोपालों में ना कोई गरीब होता है ना कोई श्रीमंत, ना कोई उच्च न कोई नीच  सब घुल मिलकर यह त्यौहार बड़ी उत्साह और रोमांच के साथ मनाते हैं|

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